दिन भर आने वाली स्पैम और धोखाधड़ी की कॉल्स से परेशान मोबाइल यूजर्स के लिए अब राहत की खबर है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने इस समस्या से निपटने के लिए एक अभूतपूर्व प्रस्ताव पेश किया है। नए नियम के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की मदद से संदिग्ध नंबरों की पहचान अपने आप होगी और बिना किसी यूजर की शिकायत के ही उन्हें तुरंत ब्लॉक या डिस्कनेक्ट कर दिया जाएगा। 

 

यह कदम तेजी से बढ़ती ऑनलाइन धोखाधड़ी की घटनाओं को देखते हुए उठाया गया है। वर्तमान में लोगों को स्पैम नंबरों के खिलाफ शिकायत दर्ज करानी पड़ती है और उसके बाद ही कार्रवाई होती है। लेकिन नई व्यवस्था में एआई खुद ही फर्जी कॉल पैटर्न को पकड़ लेगा और तत्काल एक्शन लेगा। यह भारत में दूरसंचार सुरक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है।

 

मौजूदा व्यवस्था में क्या कमियां?

 

अभी जो सिस्टम चल रहा है, उसमें कई खामियां हैं। TRAI के वर्तमान नियमों के अनुसार, किसी फर्जी या स्पैम नंबर पर तभी कार्रवाई की जाती है जब 10 दिनों की अवधि में उसके खिलाफ कम से कम पांच शिकायतें आ जाएं। इसका सीधा मतलब है कि कोई धोखेबाज कम से कम पांच लोगों को धोखा दे चुके या परेशान कर चुके, तभी उसके नंबर को बंद किया जाता है। 

 

यह व्यवस्था साफ तौर पर अपर्याप्त है क्योंकि तब तक कई मासूम लोग ठगी का शिकार हो चुके होते हैं। फिलहाल जियो, एयरटेल, वोडाफोन आइडिया और बीएसएनएल जैसी टेलीकॉम कंपनियां इस नियम को फॉलो करती हैं। जब किसी नंबर के खिलाफ 10 दिनों में पांच या उससे ज्यादा स्पैम रिपोर्ट आती हैं, तो उस नंबर की सेवा पूरी तरह बंद कर दी जाती है। लेकिन यह प्रक्रिया प्रतिक्रियात्मक है, सक्रिय नहीं। पहले नुकसान होता है, फिर कार्रवाई होती है।

 

स्पैम कॉल्स में भारी वृद्धि

 

दूरसंचार विभाग के ताजा आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। दिसंबर 2025 में स्पैम कॉल्स की शिकायतें बढ़कर रिकॉर्ड 3.34 लाख तक पहुंच गईं। फरवरी 2025 में यह संख्या केवल 1.16 लाख थी। मतलब साफ है कि महज 10 महीनों में स्पैम कॉल्स की शिकायतों में तीन गुना से भी ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। यह आंकड़ा समस्या की गंभीरता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। 

 

असल में ये आंकड़े सिर्फ उन लोगों की शिकायतों के हैं जिन्होंने फॉर्मल तरीके से रिपोर्ट दर्ज कराई। जो लोग शिकायत नहीं करते, उन्हें मिलने वाली स्पैम कॉल्स की संख्या इससे कई गुना ज्यादा होगी। हर दिन लाखों लोग बैंक अकाउंट अपडेट, लॉटरी जीतने, क्रेडिट कार्ड ऑफर, सस्ते लोन और तरह-तरह के झूठे ऑफर्स वाली कॉल्स से परेशान हो रहे हैं।

 

AI आधारित सिस्टम कैसे काम करेगा

 

TRAI के नए प्रस्ताव के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग एल्गोरिदम की मदद से स्पैम कॉल के पैटर्न को पहचाना जाएगा। एआई सिस्टम कई पैरामीटर्स का विश्लेषण करेगा जैसे कि एक नंबर से कितने अलग-अलग लोगों को कॉल की जा रही है, एक दिन में कितनी बार कॉल हो रही है, हर कॉल की अवधि कितनी है, कितनी कॉल्स रिसीवर द्वारा उठाई जा रही हैं और कितनी तुरंत काट दी जा रही हैं। एआई सिस्टम को ऐसे नंबरों की पहचान के लिए ट्रेन किया जाएगा जो असामान्य व्यवहार दिखाते हैं। 

 

मान लीजिए अगर कोई नंबर एक दिन में हजारों अलग-अलग नंबरों पर कॉल कर रहा है और ज्यादातर कॉल्स कुछ सेकंड में ही कट जा रही हैं, तो यह साफ तौर पर स्पैम का संकेत है। एआई इन संदिग्ध पैटर्न को तुरंत पकड़ लेगा और अलर्ट जारी करेगा।

 

स्वचालित कार्रवाई की प्रक्रिया

 

जब एआई किसी नंबर को संदिग्ध के रूप में चिन्हित कर देगा, तो उसे ऑटोमेटिक तरीके से ब्लॉक या सस्पेंड कर दिया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में किसी यूजर की शिकायत की जरूरत नहीं होगी। यह सिस्टम प्रोएक्टिव यानी सक्रिय होगा, जो धोखाधड़ी को होने से पहले ही रोक देगा। यही इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत है। पहले की रिएक्टिव सिस्टम में नुकसान होने के बाद कार्रवाई होती थी, लेकिन अब नुकसान होने से पहले ही एक्शन हो जाएगा। इससे लाखों लोग धोखाधड़ी के संभावित शिकार होने से बच जाएंगे। टेलीकॉम कंपनियों को भी इस सिस्टम को अपने नेटवर्क में इंटीग्रेट करना होगा ताकि रियल-टाइम में कार्रवाई हो सके।
 

वैध व्यवसायों के लिए चिंता

 

हालांकि यह प्रस्ताव सिद्धांत में बेहद प्रभावशाली है, लेकिन इसके लागू होने में कुछ चुनौतियां भी हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि एआई कहीं गलती से वैध नंबरों को भी स्पैम मानकर ब्लॉक न कर दे। जैसे कि ऑनलाइन शॉपिंग के डिलीवरी एजेंट, ओला-उबर जैसे टैक्सी ड्राइवर, कस्टमर केयर सेंटर, टेलीमार्केटिंग करने वाली रजिस्टर्ड कंपनियां, हॉस्पिटल्स, स्कूल्स - ये सभी भी दिन भर में कई लोगों को कॉल करते हैं। अगर एआई सिस्टम पर्याप्त रूप से स्मार्ट नहीं हुआ तो वह इन वैध बिजनेस कॉल्स को भी स्पैम समझ सकता है। इससे लीगल बिजनेस को नुकसान होगा और कस्टमर सर्विस पर बुरा असर पड़ेगा। सोचिए अगर किसी डिलीवरी बॉय का नंबर ब्लॉक हो गया तो कस्टमर्स को अपना ऑर्डर कैसे मिलेगा। या अगर किसी टैक्सी ड्राइवर का नंबर बंद हो गया तो वह यात्री से संपर्क कैसे करेगा।

 

टेक्नोलॉजी को परफेक्ट बनाने की जरूरत

 

इस समस्या से बचने के लिए एआई सिस्टम को बेहद सावधानी से डिजाइन और ट्रेन करना होगा। सिस्टम को वैध व्यावसायिक कॉल और स्पैम के बीच साफ फर्क करने में सक्षम होना चाहिए। शायद रजिस्टर्ड बिजनेस को एक खास कैटेगरी में रखा जा सकता है जिन पर एआई कम सख्ती से नजर रखे। या फिर ऐसे नंबरों के लिए व्हाइटलिस्ट बनाई जा सकती है। एआई को यह भी सीखना होगा कि कब कोई कॉल लेजिटिमेट बिजनेस कम्युनिकेशन है और कब वह स्पैम या फ्रॉड है। इसके लिए मल्टीपल पैरामीटर्स का एनालिसिस जरूरी होगा। सिर्फ कॉल की संख्या से फैसला नहीं किया जा सकता, बल्कि कॉल का कंटेक्स्ट, टाइमिंग, डेस्टिनेशन नंबर्स का पैटर्न और कई अन्य फैक्टर्स देखने होंगे।

 

टेलीकॉम कंपनियां पहले से कर रही हैं पहचान

 

दिलचस्प बात यह है कि टेलीकॉम कंपनियां पहले से ही संदिग्ध कॉल्स की पहचान करने में सक्षम हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, दूरसंचार कंपनियां हर महीने लगभग 30 से 40 करोड़ कॉल्स को संदिग्ध कैटेगरी में डालती हैं। लेकिन इन पर कार्रवाई सिर्फ तब होती है जब यूजर्स शिकायत करें। फिलहाल यूजर्स द्वारा रोजाना दर्ज की जाने वाली शिकायतों की संख्या केवल 10,000 के आसपास है। यह पहचाने गए संदिग्ध कॉल्स के मुकाबले बहुत कम है। इसका साफ मतलब है कि करोड़ों संदिग्ध कॉल्स पर कोई एक्शन नहीं हो रहा क्योंकि लोग शिकायत नहीं करते।

 

नए नियम से भरेगा अंतर

 

TRAI (ट्राई) का नया प्रस्ताव इसी गैप को भरने की कोशिश है। अगर टेलीकॉम कंपनियां पहले से ही इन कॉल्स को आइडेंटिफाई कर रही हैं, तो उन पर ऑटोमेटिक एक्शन क्यों नहीं लिया जा सकता? यही सवाल ट्राई ने उठाया है। एआई बेस्ड सिस्टम का मकसद यही है कि जिन कॉल्स को सिस्टम संदिग्ध मान रहा है, उन पर यूजर की शिकायत का इंतजार किए बिना तुरंत कार्रवाई हो। इससे करोड़ों संदिग्ध कॉल्स को शुरुआत में ही रोका जा सकेगा। फ्रॉडस्टर्स को पहले कॉल करने का मौका ही नहीं मिलेगा। वे कुछ ही कॉल्स के बाद पकड़े जाएंगे और उनका नंबर तुरंत बंद हो जाएगा। इससे धोखाधड़ी की घटनाओं में बड़ी कमी आने की उम्मीद है।

 

हितधारकों से राय मांगी गई

 

ट्राई ने यह प्रस्ताव पब्लिक कंसल्टेशन के लिए जारी किया है और सभी स्टेकहोल्डर्स से कमेंट्स मांगे हैं। इसमें टेलीकॉम ऑपरेटर्स, टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स, कंज्यूमर ऑर्गनाइजेशन्स, बिजनेस असोसिएशन्स और आम जनता शामिल है। सभी की फीडबैक मिलने के बाद ही फाइनल रूल्स बनाए जाएंगे। यह प्रक्रिया इसलिए जरूरी है ताकि नए नियम इफेक्टिव होने के साथ-साथ फेयर भी हों। वैध बिजनेस को बिना वजह प्रभावित नहीं होना चाहिए। शायद एक अपील मैकेनिज्म की जरूरत होगी जहां गलती से ब्लॉक हुए नंबर्स को जल्दी रिस्टोर किया जा सके।

 

तकनीकी निवेश की जरूरत

 

टेलीकॉम कंपनियों को इस सिस्टम को लागू करने के लिए काफी टेक्निकल इन्वेस्टमेंट करना होगा। एआई सिस्टम सेटअप करना, उसे ट्रेन करना, लगातार अपडेट करना और मेंटेन करना एक कॉम्प्लेक्स और महंगी प्रोसेस है। इसके लिए एडवांस्ड हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और स्किल्ड प्रोफेशनल्स की जरूरत होगी। इस खर्च को कौन उठाएगा, यह भी एक अहम सवाल है। क्या टेलीकॉम कंपनियां इसे अपनी सर्विस का हिस्सा मानकर खुद खर्च उठाएंगी या फिर इसकी कॉस्ट किसी तरह यूजर्स पर डाली जाएगी।