महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की बढ़ती समस्या चिंता का विषय बनती जा रही है। यह बीमारी अक्सर चुपचाप शरीर में पनपती है और शुरुआती लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि ज्यादातर महिलाएं उन्हें गंभीरता से नहीं लेतीं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच और जागरूकता से इस जानलेवा बीमारी से बचा जा सकता है।
बिना लक्षण भी हो सकता है कैंसर
हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक सर्वाइकल कैंसर बिना किसी दर्द या स्पष्ट संकेतों के भी विकसित हो सकता है। इससे शुरुआती चरणों में इसका पता लगाना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने बताया कि खासकर 30 साल की उम्र के बाद महिलाओं को नियमित जांच करानी चाहिए, क्योंकि इस उम्र में जोखिम बढ़ जाता है।
यह बीमारी गर्भाशय ग्रीवा की परत बनाने वाली कोशिकाओं में कैंसर पूर्व परिवर्तनों के रूप में मौजूद होती है। इसे चिकित्सीय भाषा में सर्वाइकल इंट्राएपीथेलियल नियोप्लासिया (सीआईएन 1, 2 या 3) कहा जाता है।
इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
पीरियड्स में असामान्य बदलाव: महिलाओं में ब्लीडिंग पैटर्न में बदलाव सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख संकेत हो सकता है। मासिक धर्म के बीच में अचानक रक्तस्राव होना, यौन संबंध के बाद ब्लीडिंग या पीरियड्स से पहले स्पॉटिंग होना चिंता का विषय है। कई बार महिलाएं इन लक्षणों को तनाव, हार्मोनल बदलाव या बढ़ती उम्र का प्रभाव मानकर टाल देती हैं, जो खतरनाक साबित हो सकता है।
वजाइनल डिस्चार्ज में बदलाव: सामान्य डिस्चार्ज और सर्वाइकल कैंसर के डिस्चार्ज में अंतर होता है। अगर डिस्चार्ज पानी जैसा या अत्यधिक पतला है, रंग पीला है और साथ में ब्लीडिंग भी हो रही है तो यह सामान्य नहीं है। विशेष रूप से अगर डिस्चार्ज से किसी तरह की दुर्गंध आ रही है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
पाचन तंत्र में समस्याएं: मलत्याग में भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं। अगर मल पानी जैसा है, उसका रंग पीला है या उसमें ब्लीडिंग हो रही है तो यह चिंताजनक संकेत है। मल से आने वाली दुर्गंध भी शरीर में गंभीर समस्या का संकेत हो सकती है।
देर से दिखने वाले गंभीर लक्षण
विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ लक्षण बहुत देर से दिखाई देते हैं, जब तक कैंसर दूसरे, तीसरे या चौथे चरण में पहुंच चुका होता है। इनमें शामिल हैं:
- बिना कारण तेजी से वजन घटना
- लगातार पीठ के निचले हिस्से में दर्द
- गंभीर श्रोणि संबंधी असुविधा
- पेशाब करते समय दर्द
- मल त्याग में कठिनाई
- इस स्टेज पर कैंसर आसपास के ऊतकों में फैलना शुरू हो सकता है और इलाज मुश्किल हो जाता है।
जांच और बचाव के उपाय
पैप स्मीयर टेस्ट जरूरी: पैप स्मीयर टेस्ट सर्वाइकल कैंसर की जांच का सबसे प्रभावी तरीका है। यह टेस्ट गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं में असामान्य बदलाव का पता लगा सकता है। 21 साल की उम्र से महिलाओं को हर तीन साल में यह टेस्ट करवाना चाहिए। 30 साल के बाद पैप स्मीयर के साथ एचपीवी टेस्ट भी जरूरी है।
एचपीवी वैक्सीन लगवाएं: ह्यूमन पेपिलोमावायरस (एचपीवी) सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण है। यह वायरस यौन संपर्क से फैलता है। एचपीवी वैक्सीन लगवाना इस कैंसर से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। यह टीका युवा लड़कियों और महिलाओं को समय पर लगवाना चाहिए।
नियमित स्क्रीनिंग है जरूरी: 30 साल की उम्र के बाद महिलाओं को नियमित सर्वाइकल स्क्रीनिंग जरूर करवानी चाहिए। पैप स्मीयर, एचपीवी टेस्ट या कोलोस्कोपी जैसी जांचों से बीमारी का पता कैंसर फैलने से बहुत पहले ही लगाया जा सकता है। शुरुआती स्टेज में पकड़ा गया सर्वाइकल कैंसर पूरी तरह से ठीक हो सकता है।
जोखिम बढ़ाने वाले कारक
कुछ कारक सर्वाइकल कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं। धूम्रपान करने वाली महिलाओं में यह जोखिम अधिक होता है। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली, एचआईवी संक्रमण, कम उम्र में यौन सक्रिय होना और कई यौन साथी होना भी खतरा बढ़ाता है। गर्भनिरोधक गोलियों का लंबे समय तक उपयोग भी एक जोखिम कारक हो सकता है।
स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं
हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर सर्वाइकल कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। धूम्रपान से दूर रहें, संतुलित आहार लें जिसमें पर्याप्त मात्रा में फल और सब्जियां शामिल हों। नियमित व्यायाम करें और तनाव को नियंत्रित रखें। सुरक्षित यौन संबंध बनाएं और अपनी सेहत का ध्यान रखें।
जागरूकता है सबसे बड़ा हथियार
महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के बारे में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। कई महिलाएं इस बीमारी के बारे में सही जानकारी नहीं रखतीं और उन्हें पता नहीं होता कि किन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए। जांच और टीकाकरण के महत्व को समझना और परिवार के सदस्यों को भी जागरूक करना जरूरी है।
डॉक्टरों का कहना है कि किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें और इंतजार न करें। जितनी जल्दी बीमारी का पता चलेगा, उतना बेहतर इलाज संभव है। समय पर जांच और सही उपचार से सर्वाइकल कैंसर को पूरी तरह से हराया जा सकता है।
Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। The Headlines हिंदी अपने पाठकों को हेल्थ, डाइट और फिटनेस से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने डॉक्टरों से सलाह लेने का सुझाव देता है।









