राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार के लिए बड़ी खबर आई है। केंद्र सरकार ने दिल्ली मेट्रो के फेज-5 (ए) को औपचारिक मंजूरी दे दी है। इस परियोजना के तहत तीन नए कॉरिडोर बनाए जाएंगे, जिनकी कुल लंबाई करीब 16 किलोमीटर होगी। इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 12,014.91 करोड़ रुपये है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने इस परियोजना को 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
यह फैसला दिल्ली के लोगों के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा। नए कॉरिडोर से शहर के प्रमुख इलाकों में कनेक्टिविटी बेहतर होगी। यात्रियों को तेज और सुगम सफर मिलेगा और साथ ही ट्रैफिक जाम और प्रदूषण में भी कमी आएगी।
केंद्र सरकार के कैबिनेट ने 24 दिसंबर 2025 को दिल्ली मेट्रो फेज-5(ए) को मंजूरी दी। इस फैसले से दिल्ली मेट्रो का नेटवर्क और मजबूत होगा। कुल मिलाकर दिल्ली मेट्रो का नेटवर्क 400 किलोमीटर से ज्यादा लंबा हो जाएगा। दिल्ली सरकार ने भी इस परियोजना को हरी झंडी दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में इसकी स्वीकृति मिली। दिल्ली सरकार इस प्रोजेक्ट में 2,940 करोड़ रुपये का योगदान देगी।
तीन नए कॉरिडोर कौन-कौन से हैं?
फेज-5(ए) में तीन कॉरिडोर शामिल हैं। ये सभी मौजूदा मेट्रो लाइनों के एक्सटेंशन हैं। इनसे नए इलाके मेट्रो से जुड़ेंगे।
पहला कॉरिडोर रामकृष्ण आश्रम मार्ग से इंद्रप्रस्थ तक है। इसकी लंबाई 9.9 किलोमीटर है। यह पूरी तरह अंडरग्राउंड होगा। यह कॉरिडोर सेंट्रल विस्टा क्षेत्र से गुजरेगा। इसमें 9 नए स्टेशन बनेंगे। यह मैजेंटा लाइन (लाइन-8) का विस्तार है। इस रूट से केंद्रीय क्षेत्रों, सरकारी कार्यालयों और व्यावसायिक केंद्रों तक पहुंच आसान हो जाएगी।
दूसरा कॉरिडोर एयरोसिटी से आईजीआई एयरपोर्ट टर्मिनल-1 तक है। इसकी लंबाई 2.3 किलोमीटर है। यह भी अंडरग्राउंड होगा। इससे हवाई यात्रियों को बहुत फायदा होगा। टर्मिनल-1 अब सीधे मेट्रो से जुड़ जाएगा। यात्रियों को एयरपोर्ट पहुंचने में समय और मेहनत दोनों बचेगी।
तीसरा कॉरिडोर तुगलकाबाद से कालिंदी कुंज तक है। इसकी लंबाई 3.9 किलोमीटर है। यह एलिवेटेड होगा। दक्षिण दिल्ली के इन इलाकों में रहने वाले लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। कुल तीनों कॉरिडोर में 13 नए स्टेशन बनेंगे।
मैजेंटा लाइन बनेगी सबसे लंबी मेट्रो लाइन
फेज-5(ए) के बाद दिल्ली मेट्रो की मैजेंटा लाइन देश की सबसे लंबी मेट्रो लाइन बन जाएगी। फिलहाल यह बॉटनिकल गार्डन से शुरू होकर जनकपुरी वेस्ट तक चलती है। नए विस्तार से यह इंदरलोक तक पहुंचेगी। कुल लंबाई करीब 89 किलोमीटर हो जाएगी। यह मौजूदा सबसे लंबी ब्लू लाइन से भी ज्यादा लंबी होगी।
मैजेंटा लाइन पूरी तरह ड्राइवरलेस यानी स्वचालित होगी। इससे ट्रेनों का संचालन ज्यादा सुरक्षित और कुशल होगा। मानवीय गलतियों की संभावना कम हो जाएगी। यह लाइन दिल्ली-एनसीआर में आवागमन को बहुत आसान बनाएगी।
21 इंटरचेंज स्टेशन होंगे
विस्तार के बाद मैजेंटा लाइन पर कुल 21 इंटरचेंज स्टेशन होंगे। यह किसी भी मेट्रो लाइन के लिए सबसे ज्यादा है। इंटरचेंज स्टेशन वह जगह हैं जहां यात्री एक लाइन से दूसरी लाइन में आसानी से बदल सकते हैं।
फिलहाल मैजेंटा लाइन पर चार इंटरचेंज स्टेशन हैं - कालकाजी मंदिर, बॉटनिकल गार्डन, जनकपुरी वेस्ट और हौज खास। फेज-4 और फेज-5(ए) से 17 नए इंटरचेंज स्टेशन जुड़ेंगे। इनमें कालिंदी कुंज, चिराग दिल्ली, टर्मिनल-1 आईजीआई एयरपोर्ट, पीरागढ़ी, पीतमपुरा (मधुबन चौक), हैदरपुर बादली मोड़, मजलिस पार्क, आजादपुर, पुलबंगश, नबी करीम, रामकृष्ण आश्रम मार्ग, शिवाजी स्टेडियम, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट, इंद्रप्रस्थ, दिल्ली गेट, नई दिल्ली और इंदरलोक शामिल हैं।
चार स्टेशन - सेंट्रल सेक्रेटेरिएट, आजादपुर, नई दिल्ली और इंदरलोक - ट्रिपल इंटरचेंज होंगे। यानी इन पर तीन अलग-अलग मेट्रो लाइनें मिलेंगी। इससे यात्रियों को ज्यादा विकल्प मिलेंगे। समय बचेगा और भीड़ कम होगी।
65 स्टेशन और 40 अंडरग्राउंड
मैजेंटा लाइन पर बॉटनिकल गार्डन से इंदरलोक तक कुल 65 स्टेशन होंगे। इनमें से 40 स्टेशन अंडरग्राउंड होंगे। अंडरग्राउंड स्टेशन बनाना मुश्किल और महंगा होता है। लेकिन दिल्ली के घने इलाकों में यह जरूरी है। सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में पूरा हिस्सा अंडरग्राउंड होगा। इससे ऐतिहासिक इमारतों को कोई नुकसान नहीं होगा। बाकी 25 स्टेशन एलिवेटेड होंगे। ये इलाके जहां जगह ज्यादा है वहां बनेंगे।
परियोजना की लागत और फंडिंग
पूरी परियोजना की लागत 12,014.91 करोड़ रुपये है। इसमें निर्माण, भूमि, ट्रेनें, सिग्नलिंग सिस्टम और अन्य खर्च शामिल हैं। फंडिंग केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से होगी। पहले भी जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जिका) ने दिल्ली मेट्रो में मदद की है। यह लंबे समय का निवेश है जो शहर के विकास को बढ़ावा देगा।
2028 तक पूरा होने का लक्ष्य
डीएमआरसी ने 2028 तक प्रोजेक्ट पूरा करने का टारगेट रखा है। यह समयसीमा यथार्थवादी है क्योंकि ये एक्सटेंशन हैं, नई लाइनें नहीं। लेकिन दिल्ली के व्यस्त इलाकों में निर्माण चुनौतीपूर्ण होगा। ट्रैफिक मैनेजमेंट, भूमि और सुरक्षा पर ध्यान देना होगा। डीएमआरसी का पिछला रिकॉर्ड अच्छा है। वे समय पर प्रोजेक्ट पूरा करते हैं। उम्मीद है कि यह लक्ष्य हासिल होगा।
दिल्लीवासियों को क्या फायदे?
इस प्रोजेक्ट से लाखों लोगों को फायदा होगा। यात्रा समय कम होगा। नए इलाके मेट्रो से जुड़ेंगे। प्रॉपर्टी वैल्यू बढ़ेगी। पर्यावरण को भी लाभ होगा। ज्यादा लोग मेट्रो लेंगे तो कारों की संख्या कम होगी। प्रदूषण घटेगा। एयरपोर्ट कनेक्टिविटी से पर्यटन और बिजनेस बढ़ेगा।









