वर्जीनिया ज्योफ्रे एक ऐसा नाम है जिसने दुनिया को जेफरी एपस्टीन की सच्चाई का सामना कराया। उनका काला सच इतना भयंकर और चिंताजनक था कि आज भी उसके अंश हर किसी को हैरान और ग़मज़दा कर देते हैं। अब एपस्टीन फाइल्स के लगातार कई खुलासों के बीच, उनकी कहानी फिर से सुर्खियों में आ गई। जो मानव तस्करी, सत्ता के दुरुपयोग और वैश्विक रसूखदारों की दुनिया के घिनौने पहलुओं को उजागर करती है।

 

ये मामला न सिर्फ एक व्यक्ति की बात करता है बल्कि एक ऐसे जाल का हिस्सा बयान करता है जिसमें इस दुनिया के शक्तिशाली लोगों तक के नाम शामिल हैं और अब भी न्याय व्यवस्था, मीडिया और जनता इस मामले में सवाल उठा रहे हैं।

 

एपस्टीन फाइल्स क्या है

 

एपस्टीन फाइल्स एक डॉक्यूमेंट है जिसमें सेक्स ट्रैफिकिंग मामले में कोट प्रेसेसिंग, विक्टिम के बयान और इस मामले की पूरी जानकारी है।और उसमें हाल ही में यूएस के।डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस ने जेफरी एपस्टीन के उनके कारनामों के लाखों फाइल, फोटो, वीडियो, अमेजन ऑर्डर सब कुछ पब्लिक करवाए जिसके बाद दुनिया भर में हड़कंप मच गया।

 

जेफरी एपस्टीन एक अमीर फाइनेंसर था जिसने अपनी पर्सनल कॉन्टैक्ट और संपत्ति के दम पर एक खतरनाक सेक्स ट्रैफिकिंग नेटवर्क विकसित किया था। उसने टीनएजर और नाबालिग लड़कियों को आकर्षक नौकरी और पैसे देने का लालच देकर अपने मकानों और निजी द्वीप एपस्टीन आइलैंड पर लाया जहां व्यापक स्तर से यौन शोषण, जबरन सुलभता और शारीरिक उत्पीड़न किया जाता था। इस गंदे नेटवर्क का सेंटर एपस्टीन का निजी द्वीप था जहां प्रत्यक्ष रूप से कमजोर लड़कियों का यौन शोषण और मानव तस्करी की जाती थी। कहा जाता है कि जय बार यहां पावरफुल हस्तियों की आवाजाही भी देखी गई। लेकिन अब तक इसके रिकॉर्ड सामने नहीं आए।

 

वर्जिनियन ज्यॉफ्रे ने उठाई पीड़ितों की आवाज

 

वर्जिनियन ने उस काली दुनिया की सारी सच्चाई को अपनी आत्मकथा Nobody's Girl में अपने जीवन के भयानक अनुभवों को विस्तार से बयान किया कि कैसे उन्हें किशोरावस्था में एपस्टीन के जाल में फंसाया गया, कैसे उन्हें इस रैकेट का हिस्सा बनाया गया और अमीर लोगों के हवाले कर दिया गया। कैसे उनपर शारीरिक अत्याचार हुआ...इन सबका जिक्र इस किताब में मिलता है।

 

किताब के मुताबिक, एपस्टीन और सहयोगी गीसलेन मैक्सवेल जैसे लोग पीड़ित लड़कियों को नौकरी के बहाने से खतरनाक स्थानों पर ले आते और वहां लाकर उनका शोषण करते, उनके साथ जबरदस्ती करते।

 

उनकी किताब में एक बहुत ही विवाद वाली बात लिखी गई है जो हर किसी को चौंका रही है। उन्होंने किताब में ये दावा किया है कि एक फेमस प्रधानमंत्री ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया, हालांकि प्रधानमंत्री के नाम का खुलासा किताब में नहीं मिला। अमेरिकी संस्करण ने उन्हें प्रसिद्ध पीएम कहा जबकि ब्रिटिश संस्करण में उन्हें पूर्व मंत्री के रूप में प्रस्तुत किया है। इसके बाद से ये मामला और भी ज्यादा रहस्यमय हो गया। साथ ही साथ अंतर्राष्ट्रीय विवाद भी बन चुका है।

 

कई हाई प्रोफाइल नामों की भी चर्चा

 

 

इस आत्मकथा में यानि एपस्टीन फाइल्स में कई ऐसे प्रभावशाली नाम शामिल हैं जिनके बारे में पहले संदेह था लेकिन अब संकेत मिले हैं कि वे एपस्टीन के नेटवर्क से जुड़े रहे। इनमें राजनेता, व्यापार जगत के लोग और अरबों बिलियन की दौलतमंद हस्तियों का नाम भी शामिल है। हालांकि कुछ आरोपों को लेकर अलग अलग कानूनी विवाद भी जारी है।

 

इस किताब में प्रिंस एंड्रयू का नाम भी शामिल है जिनपर वर्जिनियन ने पहले भी यौन शोषण का आरोप लगाया है। हालांकि राजकुमार ने इन आरोपों का खंडन किया।

 

एपस्टीन के मरने के 6 साल बाद क्यों हो रहा विवाद

 

अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों की मानें तो वर्जिनियन का निधन 25 अप्रैल 2025 को हुआ। उन्होंने ख़ुशकुशी की थी। उनके परिवार ने बताया कि उन्होंने खुद को खत्म कर लिया क्योंकि वे जीवन भर यौन शोषण और सेक्स ट्रैफिकिंग का काम नहीं करना चाहती थी। उनकी मौत के बाद समाज के ये बहस तेज हो गई कि क्या पीड़ितों की आवाज को ध्यान से सुना जा रहा है या सत्ता द्वारा दबाया जा रहा है। कई लोगों का आरोप है कि एपस्टीन की मौत के बाद भी अपराधियों के खिलाफ न्याय की प्रक्रिया धीमी हो गई।

 

दरअसल, एपस्टीन की मौत 2019 में जेल के अंदर हुई। उसकी काली दुनिया के दस्तावेज आज भी मौजूद हैं और हर रोज दुनिया में नए सवालों को जन्म दे रहे हैं। इस फाइल्स को सार्वजनिक करने वाला प्रयास अभी भी विवादों और आलोचनाओं के बीच है क्योंकि कई लोग कांटे है कि सिर्फ आधे दस्तावेज जारी हुए बाकी जो महत्वपूर्ण थे अब भी छुपाए जा रहे हैं।

 

ये मानव तस्करी की कहानी सिर्फ एक इंसान की आपबीती नहीं बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी  समस्याओं में से एक है। ये कहानी न्याय, पारदर्शिता और सत्ता के दुरुपयोग की।है। आज भी उस फेमस प्रधानमंत्री के नाम का जवाब हर किसी को चाहिए। आज सोशल मीडिया के दौर में पुरानी चीजें भी छुपाए नहीं छिपती। इसी का नतीजा रहा कि ये जरूरी मामला आज फिर एक बार सुर्खियों में खड़ा है।