बिहार के वैशाली जिले के जंदाहा प्रखंड के वसंतपुर धधुआ स्थित बाबा बटेश्वरनाथ धाम में महादेव को विशिष्ट बैंगन का प्रसाद चढ़ाने की परंपरा है। यहां दूर दराज से भक्त अपने खेतों की पहली उपज के रूप में बैगन को भगवान भोलेनाथ को चढ़ाते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की आशा करते हैं।
बटेश्वरनाथ धाम के बारे में
बटेश्वरनाथ धाम जो एक प्राचीन शिवालय है जिसमें वटवृक्ष की कंदरा से स्वयं प्रकट हुआ एक कला शिवलिंग स्थापित है। ये शिवलिंग अपने आप में काफी महत्वपूर्ण है और इस मंदिर की धार्मिक पहचान भी इसी चमत्कारी घटना से जुड़ी है। हर रोज यहां श्रद्धालु शिवलिंग के साथ साथ भगवान नंदी के दर्शन करने भी आते हैं।
सदियों से चली आ रही है ये परंपरा
बटेश्वरनाथ धाम के उपाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह ने बताया कि ये परंपरा सदियों पुरानी है। लोग एक दूसरे को देखकर इस परंपरा का पालन करते हैं। इसमें खेती प्रधान इस क्षेत्र के किसान अपनी फसल तैयार होने पर खेत से निकला ताजा और पहला बैगन भगवान शुभ को प्रसाद स्वरूप चढ़ाते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से उनकी खेती में अच्छी पैदावार और व्यवसायिक सफलता बनी रहती है साथ ही साथ मोटी कमाई होती है। इस तरह भगवान शिव की कृपा यहां के किसानों पर बरसती है।
यहां आने वाले हर श्रद्धालुओं का भरोसा है कि जो भी सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना होती है भगवान शिव उसे अवश्य पूरी करते हैं। मन्नत पूरी होने पर भक्त फिर से बैगन चढ़ाते हैं। कुछ श्रद्धालु तो सामर्थ्य अनुसार 11,21,51,101 किलो तक बैंगन भगवान को समर्पित करते हैं।
विशेष अवसरों पर लगता है मेला
इस धाम में महाशिवरात्रि और बसंत पंचमी जैसे विशेष अवसरों पर भव्य मेला आयोजित किया जाता है। इस वक्त हजारों की तादाद में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। इस मेले में सैकड़ों क्विंटल बैंगन भगवान शिव को चढ़ाया जाता है। बाजार में तेजपत्ता और लकड़ी के उत्पादों की भी विशेष बिक्री होती है।
शिवभक्त बिहार के विभिन्न जिलों जैसे वैशाली, छपरा, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, पटना से यहां आते हैं। कुछ विदेशी भक्त यहां भगवान शिव के दर्शन करने भी आए है। ये भक्त नेपाल और रूस से यहां शिव के दर्शन को आते हैं। इससे इस शिव धाम की अंतरराष्ट्रीय पहचान भी बनी रहती है।
खेती और आस्था का अनोखा संगम
बाबा बटेश्वरनाथ धाम न केवल एक धार्मिक स्थल है बल्कि यहां की परंपरा खेती और आस्था के गहरे संबंध रखती है। ये इलाका पूरी तरह से कृषि पर आधारित है और यहां के किसानों का जीवन भगवान शिव को समर्पित है। यहां के किसान मानते हैं कि खेत से निकली पहली फसल को भगवान को चढ़ाने से न सिर्फ खेती में बरकत होती है बल्कि प्राकृतिक आपदाओं से भी फसलों की रक्षा होती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब खेती पूरी तरह बारिश और प्रकृति पर निर्भर होती है तो किसान भगवान शिव से अच्छी पैदावार के लिए मन्नत मांगते हैं। तभी से बैंगन को प्रसाद के रूप में चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई। ये परंपरा आज भी श्रद्धा और विश्वास के साथ निभाई जाती है।
आखिर बैंगन ही क्यों चढ़ाया जाता है
आपके मन में भी ये सवाल होगा कि आखिर बैंगन ही क्यों भगवान शिव को चढ़ाया जाता है। दरअसल, बैंगन इस क्षेत्र की प्रमुख फसल है। इसे मेहनत, धैर्य और प्रतिक्षा का प्रतीक माना जाता है। किसानों का कहना है कि बैंगन की खेती में समय, देखभाल, और मेहनत ज्यादा लगती है। ऐसे में जब पहला बैंगन भगवान शिव को अर्पित किया जाता है तो ये उनकी मेहनत को ईश्वर के चरणों में समर्पित करने जैसा है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मिलता है सहारा

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ये परंपरा न सिर्फ धार्मिक बल्कि स्थानीय अर्थव्यव्स्था के लिए भी फायदेमंद है। मेले और विशेष अवसरों पर आसपास के गांवों से लोग अपने कृषि उत्पाद लेकर आते हैं। टेलपट्टा, लकड़ी से बने घरेलू सामान, पूजा सामग्री और स्थानीय हस्तशिल्प की दुकानों से ग्रामीणों को रोजगार मिल पाता है।
नई पीढ़ी निभा रही परंपरा
स्थानीय बुजुर्गों ने बताया कि उन्होंने अपने माता और पिता से इस परंपरा को अपनाया। साथ ही दादा और परदादा को भी इस परंपरा का पालन करते देखा। ऐसे में ये परंपरा चली आ रही है। आज भी नई पीढ़ी शिद्दत से इस परंपरा को निभा रही है।
भक्तों के लिए आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र
बटेश्वरनाथ धाम में आने वाले भक्तों का कहना है कि यहां आकर मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। कई भक्तों ने तो ये भी बताया कि वर्षों से रुकी हुई मनोकामना यहां आने मात्र से ही पूरी हो गई। यहीं कारण है कि एक बार दर्शन करने वाला श्रद्धालु बार बार यहां खींचा चला आता है।
धार्मिक पर्यटन की संभावना
नेपाल और रूस से यहां श्रद्धालु आ चुके हैं। बटेश्वरनाथ धाम को धार्मिक पर्याय। के रूप में भी देखा जाने लगे है। यदि प्रशासन यहां सुविधाओं का विकास करने पर जोर दे तो ये अंतरराष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन स्थल बन सकता है। स्थानीय लोगों की भी मांग है कि यहां की सड़कें, ठहरने और सुरक्षा जैसी सुविधाएं बेहतर हों।









