भारत में कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और यह देश के लिए एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है। इंडियन कैंसर सोसाइटी द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश में हर साल करीब 15 लाख नए कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते सही कदम नहीं उठाए गए तो साल 2045 तक यह संख्या बढ़कर 24 से 25 लाख तक पहुंच सकती है।

 

देश में कैंसर का बढ़ता खतरा

 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत में कैंसर के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। साल 2022 में 14.6 लाख मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2025 तक यह संख्या 15.7 लाख तक पहुंचने का अनुमान है। यह आंकड़े साल 2020 के मुकाबले करीब 12.8 फीसदी की बढ़ोतरी को दर्शाते हैं। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम के अनुसार, हर एक लाख लोगों में से करीब 100 लोग कैंसर से पीड़ित हैं।

 

2045 तक दोगुना हो सकता है कैंसर का बोझ

 

विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर यही स्थिति रही तो अगले 20 सालों में भारत में कैंसर के मामलों में 67 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से कैंसर की दवाओं पर कस्टम ड्यूटी में छूट और देसी बायोफार्मा उत्पादन को बढ़ावा देना अच्छे कदम हैं, लेकिन केवल इलाज पर ध्यान देना काफी नहीं है। जरूरत है कि लोग कैंसर की आखिरी स्टेज तक पहुंचने से पहले ही बीमारी का पता लगा लें।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती जांच और रोकथाम पर ज्यादा जोर देने की जरूरत है। समय पर पता चल जाने से इलाज आसान हो जाता है और मरीज की जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

 

क्यों बढ़ रहे हैं कैंसर के मामले?

 

विशेषज्ञों ने कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे कई कारण बताए हैं। उनके अनुसार, बढ़ती आबादी, लोगों की औसत उम्र में इजाफा, बेहतर जांच सुविधाएं, गलत खान-पान, तंबाकू और शराब का सेवन, मोटापा और शारीरिक गतिविधि की कमी प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा, शहरों में बढ़ता प्रदूषण भी कैंसर के खतरे को बढ़ा रहा है।
 

अब कैंसर कम उम्र के लोगों में भी देखने को मिल रहा है। 40 साल से कम उम्र की महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के 30 फीसदी मामले सामने आ रहे हैं। यह पश्चिमी देशों के मुकाबले ज्यादा चिंताजनक है। भारतीय पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर पश्चिमी देशों के मुकाबले 10 साल पहले ही देखने को मिल रहा है।

 

तंबाकू से जुड़े हैं 40 फीसदी मामले

 

डॉक्टरों के मुताबिक, भारत में कैंसर के 40 फीसदी मामले तंबाकू के सेवन से जुड़े हुए हैं। फेफड़े, मुंह और गले का कैंसर इसके प्रमुख उदाहरण हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू छोड़ना, शराब का सेवन कम करना, स्वस्थ वजन बनाए रखना और नियमित व्यायाम करना कैंसर के खतरे को कम कर सकता है।

 

इन तीन शुरुआती लक्षणों को न करें नजरअंदाज

 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कुछ ऐसे लक्षणों की पहचान की है जो कैंसर के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। कैंसर अक्सर शुरुआत में छोटे और साधारण लक्षणों के साथ आता है, जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं। कोई लक्षण 2 से 3 हफ्ते से ज्यादा समय तक बना रहे तो तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

 

पहला लक्षण: बिना कारण वजन घटना

 

विशेषज्ञों के अनुसार, बिना किसी खास वजह से 5 किलो या उससे ज्यादा वजन घटना कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकता है। खासकर अग्नाशय, पेट, फेफड़े या आहार नली के कैंसर में यह लक्षण दिखता है। अगर आप डाइट या एक्सरसाइज नहीं कर रहे और फिर भी वजन कम हो रहा है तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। कई बार लोग इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह शरीर का एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है।

 

दूसरा लक्षण: लगातार थकान महसूस होना

 

सामान्य थकान और कैंसर से जुड़ी थकान में बहुत फर्क होता है। अगर आपको आराम करने के बाद भी थकान दूर नहीं हो रही और यह लगातार बनी रहती है तो यह चिंता की बात हो सकती है। कैंसर की कोशिकाएं शरीर के पोषक तत्वों का इस्तेमाल करती हैं, जिससे शरीर में ऊर्जा की कमी हो जाती है। ल्यूकेमिया, पेट के कैंसर या कोलन कैंसर में यह लक्षण आम है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर थकान महीनों तक बनी रहे और नींद या आराम से भी दूर न हो तो जांच जरूर करवानी चाहिए।

 

तीसरा लक्षण: शरीर में गांठ या सूजन

 

शरीर में कहीं भी गांठ या सूजन दिखना कैंसर का सबसे आम लक्षण माना जाता है। खासकर महिलाओं में स्तन, पुरुषों में अंडकोश या गर्दन, बगल में गांठ महसूस होना कैंसर की ओर इशारा कर सकता है। पार्कवे कैंसर सेंटर के विशेषज्ञों के अनुसार, कोई भी ऐसी गांठ जो 2 हफ्ते से ज्यादा समय तक बनी रहे, बढ़ती जाए या दर्द करे, उसकी जांच जरूर करवानी चाहिए। हालांकि हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन सतर्कता जरूरी है।

 

अन्य महत्वपूर्ण लक्षण जिन पर ध्यान देना चाहिए

 

इन तीन मुख्य लक्षणों के अलावा, डॉक्टरों ने कुछ और संकेतों की भी पहचान की है। इनमें लंबे समय तक बनी रहने वाली खांसी, खून का बहाव (मल, मूत्र या योनि से), पेट की समस्याएं जो ठीक न हों, मुंह में घाव जो न भरे, तिल या मस्से में बदलाव, और लगातार बुखार शामिल हैं।

 

जल्दी पता लगाने से बढ़ती है जीवित रहने की संभावना

 

डॉक्टरों का कहना है कि कैंसर का जल्दी पता चलने से इलाज आसान और सफल हो जाता है। ब्रेस्ट कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, फेफड़े का कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर और कोलन कैंसर जैसे कई कैंसर शुरुआती दौर में पकड़े जा सकते हैं। इनका इलाज समय पर शुरू होने से मरीज की जान बचाई जा सकती है।

 

विशेषज्ञों ने बताया कि नियमित स्क्रीनिंग बहुत जरूरी है। महिलाओं को मैमोग्राफी और पैप स्मीयर टेस्ट, पुरुषों को प्रोस्टेट जांच, और धूम्रपान करने वालों को फेफड़ों की जांच नियमित रूप से करवानी चाहिए। 40 साल की उम्र के बाद तो यह और भी जरूरी हो जाती है।

 

जीवनशैली में बदलाव से कम हो सकता है खतरा

 

रिसर्च बताते हैं कि करीब 40 फीसदी कैंसर के मामले ऐसे होते हैं जिन्हें जीवनशैली में बदलाव से रोका जा सकता है। तंबाकू और शराब से दूर रहना, स्वस्थ भोजन खाना, नियमित व्यायाम करना, सही वजन बनाए रखना और तनाव से बचना कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है।

 

फलों, सब्जियों, साबुत अनाज और पारंपरिक भारतीय खाद्य पदार्थों जैसे बाजरा, ज्वार आदि का सेवन करना चाहिए। सप्ताह में 150 से 300 मिनट तक मध्यम व्यायाम जैसे योग, पैदल चलना फायदेमंद होता है। इसके अलावा, धूप से त्वचा की सुरक्षा और HPV तथा हेपेटाइटिस के टीके लगवाने से भी कैंसर का खतरा कम होता है।

 

सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं

 

विशेषज्ञों ने लोगों से आयुष्मान भारत जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने की सलाह दी है। कई एनजीओ और अस्पताल मुफ्त या कम कीमत पर कैंसर की जांच और इलाज की सुविधा देते हैं। लोगों को इन सुविधाओं की जानकारी होनी चाहिए।