आज कल डिजिटल टेक्नोलॉजी के दौर में लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशन को ईमानदारी से निभा पाना बेहद मुश्किल है। ये ऐप अब हमारे रिश्तों की नब्ज बन चुकी है। आप किसी मैसेज को कितने समय में देखते हो, कब उसका जवाब देते हो, कितनी देर में रिप्लाई किया गया...ये सब अब रिश्तों की अहमियत तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में आज हम व्हाट्सएप पर seen करके छोड़ देते हैं तो।रिश्तों में नाजुकता आ जाती है। आखिर ऐसा क्यों होता है? मैसेज seen छोड़ देना क्या संकेत देता है।
व्हाट्सएप पर seen करके छोड़ने के हैं कई साइड इफेक्ट
शुरुवात में seen का मतलब था कि सामने वाले बंदे ने मैसेज पढ़ लिया है। लेकिन अब इसका।मतलब अलग हो गया है इसका ये मतलब है कि मैसेज देखा तो गया लेकिन जवाब देने की जरूरत नहीं समझी। फिर यहीं से गलतफहमी की शुरुआत यही से होती है। मैसेज भेजने वाला सोचता है कि अगर सामने वाले ने समय निकालकर मैसेज पढ़ लिया तो जवाब देना भी उनकी जिम्मेदारी है। अगर उन्होंने जवाब नहीं दिया मतलब वो इग्नोर कर रहे हैं।
अगर व्हाट्सएप पर मैसेज seen करके छोड़ देते हैं तो इससे रिश्तों में असुरक्षा पैदा होती है। मन में कई सवाल आने लगते हैं। कहीं मैंने कुछ गलत तो नहीं कह दिया? क्या मैं उसकी प्राथमिकता नहीं रहीं? क्या वह जानबुझकर इग्नोर कर रहा है?
इस तरह धीरे धीरे रिश्तों में खुद ब खुद दूरियां आ जाती हैं। खासकर करीबी दोस्तों, रिश्तों, प्रेम संबंध या पति और पत्नी के बीच इस तरह के व्यवहार दूरी पैदा करती है। आज के समय में। लोगों से व्हाट्सएप को लेकर कुछ डिजिटल शिष्टाचार के नियम खुद ब खुद बना लिए हैं। जैसे, seen किया है तो जवाब देना चाहिए। तुरंत नहीं भी तो थोड़ी देर में जवाब आना ही चाहिए। लेकिन जब आपकी ये उम्मीद पूरी नहीं होती तो खुद को आप महत्वहीन समझने लगते हैं। जिसके बाद हमारे रिश्ते खराब होने लग जाते हैं।
यहीं से होती है ओवर थिंकिंग की शुरुआत
व्हाट्सएप पर मैसेज सीन छोड़ने के बाद ओवर थिंकिंग जनम लेती है। एक छोटा सा नीला टिक दिमाग में कई कहानियां बना देता है। लोग घंटों तक chat दोबारा पढ़ते हैं। अपने शब्दों का विश्लेषण करते हैं और बेवजह तनाव पालने लग जाते हैं । उधर, सोशल मीडिया और व्हाट्सएप स्टेटस ने समस्या को और भी बढ़ा दिया है। Seen छोड़ने के बाद अगर सामने वाला स्टेटस लगा दे या ऑनलाइन आ जाए तो मामला और बिगड़ जाता है। जिसके बाद तुरंत रिश्तों की तुलना शुरू हो जाती है। जैसे, मेरे मैसेज का जवाब नहीं दिया लेकिन दूसरों के लिए समय है। यहीं तुलना आगे चलकर नाराजगी का कारण बनती है और रिश्तों में खटास पैदा कर देती है। आज रिश्तों में बातचीत की जगह व्हाट्सएप पर टेक्स्ट ने ले ली है। Seen जैसे फीचर ने रिश्तों में धैर्य की जगह जल्दबाजी और अपेक्षाएं बढ़ा दी हैं। हमें ये ध्यान रखना पड़ेगा कि हर इंसान को डिजिटल आदतें अलग होती हैं। जैसे, कुछ लोग काम के बीच मैसेज देख लेते हैं लेकिन जवाब नहीं दे पाते। कुछ लोग जवाब देने से पहले बहुत सोचते हैं। लेकिन उधर दूसरी तरफ मैसेज भेजने वाला इन बातों की जाने बिना रिश्ते टोकने बैठ जाता है। अक्सर सोशल मीडिया के जरिए रिश्ते इसलिए बिगड़ते हैं क्योंकि हम मैसेज को भावना से जोड़ देते हैं, जवाब न मिलने को अनदेखी मान लेते हैं। बातचीत नहीं करने को अहंकार समझते हैं।
इसका यहीं समाधान है कि चुप्पी तोड़े। एक छोटा सा मैसेज टेक्स्ट करें। ये लिखना की बाद में बात करेंगे...ये भी काफी है। हर seen का मतलब इग्नोर करना नहीं होता। कुछ से इमेजिन करना बंद करें।

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व्हाट्सएप का सीन फीचर तकनीकी रूप से छोटा सा फीचर ही है लेकिन ये रिश्तों को तोड़ने की बड़ी ताकत रखता है। हर नीति टिक को रिश्तों की कसौटी मान ली जाती है जो गलत है। ये दो लोगों के बीच तनाव और गलतफहमी पैदा करता है।
सीन छोड़ देना भी एक तरह का जवाब माना जाने लगा है। यहीं कि सामने वाला इंसान हमसे बात ही नहीं करना चाहता। ये एक तरह का मानसिक दबाव महसूस कराता है। जब हमारी एसपेक्टेशन पूरी नहीं होती तो हमें गुस्सा आता है। सच तो ये हैं कि व्हाट्सएप पर शब्द देखे जा सकते हैं लेकिन किसी की भावना को समझा नहीं जा सकता। आज लोग सुबह से शाम तक बहुत बिजी रहने लग गए हैं। जिस वजह से कॉल्स और नोटिफिकेशन के बीच मैसेज कही खो आ जाता है। अब ऐसे मन सामने वाला इंसान इसे ये समझ बैठता है कि आप उन्हें इग्नोर कर रहे हैं। यहीं से रिश्तों में शिकायतें शुरू होती हैं।
कई सर्वे में ये देखा गया है कि महिलाओं और युवाओं पर सीन छोड़ देने से ज्यादा प्रभाव पड़ता है। ये इन्हें भावनात्मक रूप से ज्यादा गंभीरता से लेती हैं। ये रिश्तों के साथ साथ हमारे मानसित स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती हैं। रिश्तों को बचाने के लिए आपको कुछ जरूरी कदम उठाने ही लड़ेंगे। जैसे, seen करने के बाद जवाब देने में देर हो रही हो तो बता देना रिश्तों को बचा सकती है। ये बता दें कि मै इस वक्त बिजी हूं। बस इतना कहना ही सामने वाले के लिए सेटिस्फेक्टरी हो जाता है।









