एक समय था जब किसी सवाल का जवाब ढूंढने के लिए किताबें पढ़ते थे, लोगों से बातचीत करते थे और दिमाग पर थोड़ा जोर देते थे। लेकिन जब आज एक क्लिक में सारी चीजें मुहैया हो जाती हैं तो कौन किताब पढ़ेगा और कौन लोगों से बात करेगा। जी हां, हम बात कर रहे हैं AI की। Ai ने हमारी जिंदगी को बेहद आसान बना दिया है। बस कुछ भी पूछो उसका जवाब तुरंत मिल जाता है। इससे जिंदगी बेहद आसान हो जाती है। हालांकि AI इंसान की जिंदगी को जितना आसान बनाता है उतना ही इसने सोचने की क्षमता को कम किया है। मानव की कलात्मक क्षमता को कम कर दिया है। आज हम इस आर्टिकल में यही जानने की कोशिश करेंगे कि क्या AI की वजह से इंसान धीरे धीरे सोचना भूल जाता है।
AI ने बनाया दूसरों पर निर्भर
जब हम किसी समस्या का सामना करते हैं तो इंसान खुद के ऊपर डिपेंड रहने को छोड़कर दूसरों के ऊपर डिपेंड रहने लगा है। किसी भी समस्या से निपटने के लिए वो खुद कोशिश न करके दूसरों पर निर्भर रहता है। जैसे...कोई गणित का सवाल हो, कोई आर्टिकल लिखना और या अपने लिए कोई फैसला लेना हो इन सब के लिए हम AI पर निर्भर रहने लगे हैं। हम सीधे AI से पूछते हैं। यही बात धीरे धीरे हमारी सोचने की क्षमता को कमजोर कर देती है।
AI हमारी सोचने की क्षमता को कमजोर करता है
AI का उपयोग करने का सबसे बड़ा नुकसान ये है कि ये हमें तुरंत जवाब दे देता है। लेकिन हम ये भूल जाते हैं कि जब इंसान खुद सोचता है तो वो खुद से सवाल करता है, दिमाग टटोलता है, खुद में तर्क करता है, गलती करता है तो सीखता है यानि आप जितना गलती करेंगे उतना ही सीखेंगे। लेकिन AI ये पूरी प्रक्रिया खत्म कर देता है। जब आसानी से आपको जवाब मिल जाता है तो आप सोचते हैं कि फिर क्यों मेहनत करें। और यही चीज हंस दिन प्रतिदिन पीछे खींच लेती है। यहां तक कि AI निर्णय लेने की क्षमता को खत्म कर देती है। क्या खरीदना चाहिए, क्या देखना चाहिए, क्या पढ़ना चाहिए और यहां तक कि क्या महसूस करे..इस सब चीजों को करने से पहले भी हम AI से पूछते हैं।
...इसलिए दिमाग हो रहा कमजोर

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जब हर जानकारी हर समय ऑनलाइन उपलब्ध हो तो दिमाग उसे याद रखने की जरूरत ही क्यों समझे। यहां तक कि फोन नंबर याद नहीं करते, रास्ते याद नहीं रखते, सामान्य तथ्य भी भूलने लगे हैं।
सिर्फ काफी पेस्ट का कल्चर हो रहा फॉलो
ध्यान रहे कि AI कंटेंट लिख सकता है, तस्वीर बना सकता है, आपके दिनचर्या के कई काम आसान बना सकता है लेकिन दूसरी ओर इसी AI की वजह से आज कॉपी पेस्ट का कल्चर फॉलो हो रहा है जो क्रिएटिविटी को धीरे धीरे खत्म कर रहा है। आज इसी का नतीजा है कि लोग खुद लिखने से बचने लगे हैं। अपनी भाषा और विचार पर विकास नहीं कर पाते, ओरिजिनल सोच की जगह AI जनरेटेड सोच अपनाई जा रही है।
Gen z और आलस
विशेषज्ञों के मुताबिक, Gen Z में मानसिक आलस बढ़ रहा है। इन्हें हर चीज तुरंत चाहिए। जवाब, समाधान और मनोरंजन ये सब आसानी से मिल जाता है। आसानी से मिल जाने के बाद वो खुद का दिमाग यूज नहीं करते। आज लंबे समय तक सोचने, पढ़ने और विश्लेषण करने की क्षमता घट रही है। इसका सीधा असर शिक्षा, करियर और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। ये कहना गलत होगा कि इसमें सिर्फ AI ही जिम्मेदार है। असल समस्या है कि AI का जरूरत से ज्यादा और गलत इस्तेमाल हो रहा है जो हमारी रचनात्मकता को खत्म कर रहा है। बस आपको यही ध्यान रखना चाहिए कि AI से सीखने में मदद ली जाए, उसे सहायक के रूप में ही इस्तेमाल करें, और अंतिम निर्णय इंसान खुद ले। याद रखें, हर सवाल का जवाब AI से न पूछें, खुद पढ़ें और खुद समझे, बच्चों में सवाल पूछने की आदत विकसित करें, डिजिटल डिटॉक्स लाइफस्टाइल फॉलो करें, ध्यान रखें कि AI को सहायक बनाएं न कि मालिक।
आज AI ने हमारी जिंदगी को बेहद आसान बना दिया है। कुछ भी AI से पूछे बिना काम किए जवाब हाजिर हो जाता है।
हर सवाल का जवाब AI से लेना छोड़े। खुद को आत्मनिर्भर बनाए, निर्भर नहीं। ये आज के समय की सबसे बड़ी चुनौती है कि तकनीक इंसान को कंट्रोल नहीं करे बल्कि इंसान तकनीक को कंट्रोल करे। अगर इसके बीच में संतुलन नहीं बनाया गया तो सुविधा के बदले इंसान को अपनी सबसे बड़ी ताकत दिमाग से हाथ धोना पड़ेगा।
ध्यान रखें कि AI हमारी जिंदगी आसान बना सकता है लेकिन हमें जीना कैसे है इसके लिए AI का सहारा लेने से बचें। जिस दिन आपने ऐसा करना शुरू कर दिया उस दिन ये तकनीक आपकी कमजोरी बन जाएगी।
ध्यान रखें, अगर आज आपको बाकियों से अलग कुछ खास करना है तो खुद का दिमाग इस्तेमाल करना पड़ेगा। खुद से सोचना पड़ेगा तभी आप कुछ सबसे अलग सबसे हटकर कर सकते हैं। आज सफलता पाना है तो सिर्फ अपने मन की सुननी पड़ेगी न कि AI की।









