आज हम बात करेंगे भारत के उस ऐतिहासिक बजट की जिसकी वजह से IT सेक्टर में क्रांति आई थी, और फिर इसे मिलेनियम बजट कहा जाने लगा। इस बजट को आज भी जब IT सेक्टर में क्रांति की चर्चा होती है तो याद किया जाता है। इस बजट ने सूचना प्रौद्योगिकी को नई ऊंचाईयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी। ये बजट साल 2000-2001 में तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा द्वारा पेश किया गया था। इसे मिलेनियम बजट यानी नई सदी का बजट कहते हैं।
इस बजट का उद्देश्य था IT सेक्टर में भारत को वैश्विक स्तर पर एक अलग पहचान दिलाना। इस बजट में कंप्यूटर और कंप्यूटर से जुड़े उपकरण पर कस्टम ड्यूटी को हटाया गया और 21 प्रकार के IT उत्पादों पर टैक्स में रियायत दी गई। इस बजट का लाभ ये हुआ कि देश में सूचना तकनीक का वितरित उपयोग शुरू हुआ।
मिलेनियम बजट का ऐसे हुआ लाभ
मिलेनियम बजट का लाभ शिक्षा और उद्यमिता को मिला। सस्ती तकनीकी उपकरण के कारण IT का कोर्स सस्ता हो गया वहीं प्रशिक्षण संस्थानों की संख्या में भी विस्तार हुआ। ऐसे में ये कहा जा सकता है कि मिलेनियम बजट ने भारत के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर प्रदान किए।
इसने सॉफ्टवेयर निर्यातकों को मिलने वाले कुछ प्रोत्साहन को समाप्त किया। ऐसे में घरेलू कंपनियों को स्थिर और प्रतिस्पर्धी बाजार में टिकने का अवसर मिला। इसी बजट के कारण भारत विश्व के प्रमुख IT विकास और सेवा केंद्रों में से एक बन गया।
IT सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा
आज IT सेक्टर और डिजिटल सर्विस देश की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा बन चुका है। ये मिलेनियम बजट का ही परिणाम बताया जाता है। इस बजट ने सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर और तकनीकी सेवा क्षेत्र में क्रांति का दी
बता दें, इस बार 1 फरवरी को भारत का बजट वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया जाना है। हर किसी की निगाहें इसी बात पर टिकी हैं कि इस बार हर सेक्टर को कितना और क्या मिलता है।









