1 फरवरी, 2026 को भारत का केंद्रीय बजट आएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बजट को पेश करेंगी। वे अपनी शासनकाल में 9वीं बार यूनियन बजट पेश करने वाली हैं। लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि पहले भारत का केंद्रीय बजट अंग्रेजी में पेश किया जाता था। बाद में इसे हिंदी में क्यों पेश किया जाने लगा...आज हम आपको इसके पीछे का कारण बताएंगे।
बाद में हिंदी बजट की परंपरा कैसे शुरू हुई?
भारत का केंद्रीय बजट हर साल सदन में पेश किया जाता है। ये आगामी वित्त वर्ष का एक रोडमैप होता है। ये बताता है कि केंद्र सरकार इस बार किस सेक्टर में कितना पैसा इन्वेस्ट करने वाली है और पूरे साल भर क्या-क्या काम होंगे।आज जब बजट को हिंदी सहित कई भाषाओं में देख सकते हैं, पढ़ सकते हैं। इसके पीछे एक लंबा ऐतिहासिक सफर है।
1860 के दशक में भारत में केंद्रीय बजट की परंपरा शुरू हुई। उस वक्त देश में अंग्रेजों का शासन था। इस कारण बजट को केवल अंग्रेजी में ही पेश किया जाता था। उस समय संसद जैसी व्यवस्था नहीं थी और बजट केवल अंग्रेजी में ही तैयार होता था। इतना ही नहीं स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी अंग्रेजों का प्रभाव बरकरार था। भारत 1947 में आजाद तो हुआ लेकिन सरकारी दस्तावेज और प्रक्रियाएं सब वहीं थी। इसी कारण स्वतंत्र भारत का पहला बजट भी अंग्रेजी भाषा में ही जारी किया गया था और इसे आम आदमी के सामने अंग्रेजी भाषा में ही रखा गया।
कैसे शुरू हुआ हिंदी बजट का सफर
साल 1955 में महत्वपूर्ण बदलाव हुए। तत्कालीन वित्त मंत्री C.D. देशमुख ने बजट दस्तावेज हिंदी और अंग्रेजी दोनों में तैयार और प्रकाशित करने का निणर्य लिया। इस फैसले का उद्देश्य था कि आम लोगों को राष्ट्रीय वित्तीय फैसलों तक बेहतर पहुंच मिले। आज बजट हिंदी सहित कई भाषाओं में आम लोगों के लिए उपलब्ध है ताकि भारत के करोड़ों नागरिक इसे आसानी से समझ सकें।









