भारत का आम बजट हर साल 1 फरवरी को संसद में पेश किया जाता है। ये देश की आर्थिक स्थिति, सरकार की प्राथमिकताएं और लोगों से जुड़ी नीतियों की झलक भी देता है। लेकिन हर किसी के दिल में ये सवाल है कि भारत का यूनियन बजट तैयार कैसे किया जाता है?
ऐसे होता है यूनियन बजट तैयार
देश का यूनियन बजट तैयार करने की तैयारी अगस्त या सितंबर से हो जाती है। वित्त मंत्रालय सभी केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और राज्यों से अगले वित्त वर्ष के लिए उनके खर्च और योजनाओं के प्रस्ताव मांगता है। जिसके बाद हर मंत्रालय अपने बजट का अनुमान तैयार करके वित्त मंत्रालय को भेजता है। इसमें योजनाओं, सब्सिडी, वेतन, इन्फ्रास्ट्रक्चर और अन्य जरूरतों का ब्योरा होता है।
ब्यौरे की गहन समीक्षा होती है
इसके बाद वित्त विभाग ब्यौरे की गहन समीक्षा करता है। ये देखा जाता है कि कौन-कौन सी योजना जरूरी है, कहां कटौती की जा सकती है। ये भी देखा जाता है कि किन क्षेत्रों में ज्यादा निवेश की जरूरत होती है। इस दौरान सरकार की आर्थिक स्थिति, राजकोषीय घाटा, कर्ज और विकास दर जैसे पहलू पर चर्चा होती है।वित्त मंत्रालय का राजस्व विभाग टैक्स से आने वाली आमदनी का अनुमान लगाता है। आयकर, जीएसटी, कस्टम ड्यूटी का आकलन किया जाता है।
प्री बजट कंसल्टेशन
बजट प्रक्रिया का अहम हिस्सा प्री बजट कंसल्टेशन है। इसमें वित्त मंत्री उद्योग जगत, किसानों, अर्थशास्त्रियों, ट्रेड यूनियन और विभिन्न हितधारकों से सुझाव लेते हैं। जिसके बाद नीतियों में बदलाव किया जाता है। जनवरी के मध्य से बजट दस्तावेजों की छपाई शुरू हो जाती है। जिसके बाद 1 फरवरी को इसे लोकसभा में पेश किया जाता है। इस तरह भारत का यूनियन बजट तैयार किया जाता है। इस बार भी 1 फरवरी को भारत का यूनियन बजट आयेगा जो आने वाले वित्तीय वर्ष 2026-2027 में देश की आर्थिक तस्वीर तय करेगा।









