केंद्रीय बजट 2017-18 भारत का एक ऐतिहासिक बजट सत्र है जहां कई चीजें बदली गई। इस बजट को तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संसद में पेश किया था। ये बजट न सर्द अर्थव्यवस्था की दिशा बदलने वाला था बल्कि dimonetisation के बाद पहला बजट था।
2017 के बजट में ये थे बड़े बदलाव
1. बजट पेशी की तारीख 28 फरवरी से हटाकर हमेशा हमेशा के लिए 1 फरवरी कर दी गई। तब से लेकर आज तक केंद्रीय बजट 1 फरवरी को ही सदन में पेश होता है। ऐसा इसलिए किया गया ताकि बजट पर चर्चा समय पर पूरी कर लो जाए और वित्त वर्ष यानी 1 अप्रैल तक इसे लागू कर दिया जाए।
2. आयकर दरों में कटौती की गई। जिनकी सालाना आय 2.5 से 5 लाख थी, कर दर 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया। इससे लोगों के ऊपर कर का बोझ कम हुआ।
3. 2017 के बजट में रेलवे के बजट को सामान्य बजट का हिस्सा बना दिया गया। जो पहले अलग पेश होता था।
4. इस बजट में ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में जोर दिया गया। कृषि ऋण लक्ष्य को 10 लाख करोड़ पर निर्धारित किया गया।
5. इस बजट में सार्वजनिक बुनियादी ढांचे जैसे रेल, सड़क और शिपिंग पर खर्च को बढ़ाया गया। 2.41 लाख करोड़ का निवेश प्रस्तावित किया गया।
6. साथ ही साथ, डिजिटल भारत और डिजिटल भुगतान को मजबूत करने के लिए एडहार पे और मोबाइल वॉलेट सिस्टम को बढ़ावा मिला। इससे कैशलेश लेनदेन बढ़ने लगा।
7. बजट 2017-18 को बजट विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों ने प्रो रूरल, टैक्स सुधार और संरचनात्मक परिवर्तन कहा।
बता दें, इस बार बजट रविवार 1 फरवरी को निर्मला सीतारमण द्वारा घोषित किया जाना प्रस्तावित है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट पर हर आम आदमी की निगाहें टिकी हैं। बता दें, वित्त मंत्री निर्मला इस बार 9वीं बार बजट पेश करने जा रही हैं। देखना ये है कि इस बार के बजट में टैक्स को लेकर आम आदमी को कितनी छूट दी जाती है, साथ ही साथ आम आदमी के हक में बजट का कितना हिस्सा आ पाता है।









