आपके मन में भी ये बड़ा सवाल होगा कि क्या आपके परफ्यूम की कोई एक्सपायरी डेट भी होती है? आज हम आपके सवालों का जवाब जानने की कोशिश करेंगे। इतना ही नहीं ये भी बताएंगे कि ऐसा क्यों होगा है, अगर परफ्यूम एक समय के बाद खराब हो जाती है तो कैसे खराब हो जाती है...ऐसे कौन-कौन-से घटक हैं जो इसकी गुणवत्ता को नुकसान पहुंचाते हैं। ये भी बताएंगे कि परफ्यूम की एक्सपायरी डेट वाली बात क्या सिर्फ एक मार्केटिंग ट्रिक है? परफ्यूम ब्रांड की सच्चाई जाननी है तो ये आर्टिकल सिर्फ और सिर्फ आपके लिए हैं। 

 

क्या परफ्यूम की एक्सपायरी डेट होती है ?

 

असली सच्चाई तो ब्रांड आपको नहीं बताएगा। अगर आप अपने परफ्यूम की बोतल के पीछे देखो तो आपको EXP 2026 या कहीं एक छोटा-सा 36M देखने को मिलेगा। इसे देखते ही दिमाग में सवाल आता है कि क्या वाकई हमारा  परफ्यूम एक्सपायर हो जाता है या फिर परफ्यूम कंपनियां ये झूठा खेल मार्केटिंग के लिए खेलती हैं ? कहीं ऐसा तो नहीं कि कंपनियां हमें डराकर दुबारा परफ्यूम खरीदने पर मजबूर कर रही हैं। आपको हम इन सारे सवालों का जवाब सिर्फ हां या नहीं में न देकर बिजनेस, साइंस, केमिस्ट्री और कंज्यूमर साइकोलॉजी के तरीके से देने की कोशिश करेंगे।

 

ऐसे बनाया जाता है परफ्यूम

 

                                                                         Image Credit: canva 

परफ्यूम खराब होती है या नहीं ये जानने के लिए जानना जरूरी है कि परफ्यूम किन घटकों से मिलकर बनती है। बता दें कि परफ्यूम कोई दूध या दही नहीं है जो तारीख के बाद जहरीला हो जाए। दरअसल, परफ्यूम बनाने में 70-90% अल्कोहल, फ्रेगरेंस ऑयल्स और थोड़ी मात्रा में पानी और स्टेबलाइजर का इस्तेमाल किया जाता है। अल्कोहल खुद एक प्रिजर्वेटिव होता है। अल्कोहल का इस्तेमाल होने के कारण ही कई परफ्यूम 10 से भी अधिक सालों तक उपयोग में लिए जा सकते हैं। लेकिन फिर भी सवाल पूरा क्लीयर नहीं हुआ। अभी भी सवाल ये है कि जब परफ्यूम में अल्कोहल है तो कई परफ्यूम बोतल के पीछे एक्सपायरी डेट क्यों ? 

 

कई परफ्यूम बोतल के पीछे एक्सपायरी डेट क्यों ?

 

कई परफ्यूम बोतल के पीछे एक्सपायरी डेट क्यों होता है? दरअसल, इसका संबंध साइंस नहीं, क्वालिटी से है और यहीं टूटता है हम सभी का सबसे बड़ा भ्रम। बता दें आपको कि परफ्यूम एक्सपायर नहीं होता, उसकी क्वालिटी एक्सपायर होती है।

 

समय के साथ आपके परफ्यूम में होते हैं ये बड़े बदलाव 

 

जैसे-जैसे साल बीतता जाता है आपके परफ्यूम की गुणवत्ता बदलती जाती है। आपके परफ्यूम से टॉप नोट्स (नींबू, बर्गामोट जैसे हल्के नोट) उड़ जाते हैं। साथ ही साथ जब ये ऑक्सीजन के संपर्क में आते हैं तो ऑयल्स ऑक्सीडाइज हो जाते हैं। समय के साथ आपके परफ्यूम की खुशबू बैलेंस खो देती है। 

 

कहने का मतलब ये नहीं है कि समय के साथ आपके परफ्यूम जानलेवा हो जाता है बल्कि बात इतनी-सी है कि समय के साथ परफ्यूम वो वाला एहसास नहीं दे पाता जिसके लिए आपने पैसे दिए थे। परफ्यूम ब्रांड्स इसे सीधा शब्दों में नहीं कहते, इसलिए एक्सपायरी डेट लिख देते हैं।

 

परफ्यूम बोतल पर 24M, 36M, 48M लिखने का क्या मतलब है ?  

 

अगर आपने कभी ध्यान दिया होगा तो देखा जरूर होगा कि आपके परफ्यूम की बोतल पर 24M, 36M, 48M लिखा होता है। आपके मन में भी इसे देखकर सवाल उमड़ा होगा कि इसका क्या मतलब है ? दरअसल, यहां 'M' का मतलब Month से है। इसके आगे लिखा नंबर महीनों की संख्या बताता है कि बोतल खुलने के कितने महीनों तक इस परफ्यूम की क्वालिटी बेस्ट बनी रहेगी। यहां, 24M मतलब 24 महीने, 36M मतलब 36 महीने और 48M मतलब 48 महीने होते हैं। 

 

यहां से शुरू होता है मार्केटिंग का खेल

 

गौर करने वाली बात तो ये है कि हर कोई इस खेल को नहीं समझ पाता। 24M, 36M, 48M लिखने का मतलब नहीं समझने के कारण लोग मार्केटिंग ट्रिक में फंस जाते हैं। ये एक डर का बिजनेस गेम खेलती है कि आपका परफ्यूम इतने दिनों बाद खराब हो गया अब बदल दीजिए और नया खरीदें। ये सच्चाई आपको चौंकाएगी कि अगर बोतल पर एक्सपायरी डेट न लिखी जाए तो ग्राहक 10 साल पुराना परफ्यूम भी इस्तेमाल करेगा, री-परचेज कम होगा और परफ्यूम ब्रांड्स के सेल्स गिर जाएंगे इसलिए एक्सपायरी डेट एक तरह का Psychological Trigger है। ये चीजें लग्जरी ब्रांड्स, डिजाइनर परफ्यूम और हाई प्राइस टैग वाले प्रोडक्ट्स में ज्यादा देखने को मिलते हैं।  

 

सस्ते और महंगे परफ्यूम में क्या अंतर है ?

 

क्या सस्ते और महंगे परफ्यूम में भी कोई अंतर होता है? इसका सीधा जवाब है जी हां। सस्ते और महंगे परफ्यूम में बहुत बड़ा फर्क होता है। सस्ते परफ्यूम में सिंथेटिक ऑयल का इस्तेमाल ज्यादा होता है। इनमें स्टेबलाइजर कम होता है। ये समय के साथ जल्दी स्मेल बदलती है। लेकिन वहीं महंगे परफ्यूम की बात करें तो ये नेचुरल एसेंशियल ऑयल से बनती है, बेहतर ब्लेंडिंग और ये सही स्टोरेज में 10-15 साल भी चल सकते हैं। यहीं वजह है कि किसी के पास 12 साल पुराना परफ्यूम भी कमाल का सुगंध देता है तो वहीं किसी का 2 साल पुराना लोकल परफ्यूम बेकार हो जाता है। 

 

खराब परफ्यूम की पहचान ऐसे करें

 

क्या आपका परफ्यूम हो गया है, ये जानने के लिए एक सिंपल टेस्ट कर सकते हैं। अगर आपके परफ्यूम का रंग बहुत गहरा या धुंधला हो गया हो, इसकी खुशबू खट्टीया मेटल जैसीलग रही हो या फिर इसे लगाने पर जलन महसूस होने लगे तो समझ जाना आपकी परफ्यूम खराब हो गई है। 90% परफ्यूम इसलिए खराब होते हैं क्योंकि लोग इसे बाथरूम में रख देते हैं, धूप में रखते हैं या फिर परफ्यूम बोतल का ढक्कन खुला छोड़ देते हैं।