02 December 2025

मंदिर में प्रवेश करने से पहले पहली सीढ़ी को क्यों छुआ जाता है? 90% लोग नहीं जानते इसका कारण

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आपने देखा होगा कि जब लोग मंदिर में प्रवेश करते हैं, तो मंदिर की पहली सीढ़ी का इस्तेमाल उसे झुककर प्रणाम कर के करते हैं। प्राचीन समय में जब लोग मंदिर से बाहर निकलते थे, तो मंदिर की सीढ़ियों पर बैठते थे। इसके पीछे भी एक बड़ा कारण है चलिए जानते हैं

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मंदिर में प्रवेश करने से पहले बहुत सारे नियमों का लोग पालन करते हैं, जैसे कि जूते-चप्पल उतारना, हाथ-पैर धोना, सर ढंकना,  लेकिन उस सबके बाद जब लोग मंदिर में प्रवेश करने लगते हैं, तो मंदिर की पहली सीढ़ी को झुककर प्रणाम करते हैं।

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मंदिर की पहली सीढ़ी

मंदिर में प्रवेश करते समय सीढ़ियों को झुककर छूना एक प्रथा के साथ-साथ एक आस्था भी है लेकिन इस आस्था या प्रथा को निभाने के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं। वो कारण क्या हैं, चलिए जानते हैं...

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सीढ़ीयों को छुना एक प्रथा

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जब आप सीढ़ी को झुककर प्रणाम करते हैं, तो सबसे पहले उस देवता को सम्मान देते हैं, जिसके आप दर्शन करने जा रहे। मंदिर एक पवित्र जगह है, तो प्रणाम करना इस बात का भी संकेत है कि आप हर तरह की नकारात्मक भावना को पीछे छोड़ मंदिर में प्रवेश करने को तैयार हैं। यह आपको जमीन से जुड़ा हुआ महसूस कराता है। 

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मंदिर की सीढ़ियों को झुक कर छूने से व्यक्ति के अंदर का सारा गुस्सा और अहंकार खत्म हो जाता है। मंदिर में प्रवेश करते वक्त सीढ़ियों को झुककर छूना और आशीर्वाद लेना, आपके आत्मसमर्पण का दिखाता है। मंदिर की पहली सीढ़ी आपको भगवान से जोड़ती है। 

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आपने प्राचीन परम्पराओं में देखा होगा कि लोग मंदिर से निकलकर अक्सर मंदिर की सीढ़ी पर बैठकर अपना वक्त बिताते थे।  इसके पीछे भी एक बड़ा रहस्य छुपा हुआ है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मंदिर के शिखर को देव विग्रह का मुख और उसकी सीढ़ियों को उनकी चरण पादुका माना जाता है। 

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मंदिर की सीढ़ियों पर बैठने का रहस्य

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यही वजह है कि शिखर के दर्शन के बाद लोग मंदिर की सीढ़ियों पर बैठकर देवी-देवताओं को याद करते थे। मंदिर की सीढ़ियां देव विग्रह के पांव के सामान होती है, जहां जो भी सच्चे मन से ईश्वर से प्रार्थना करता है, उसकी मनोकामना जल्द पूरी होती है।

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