06 December 2025
तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा आने वाले 6 जुलाई को 90 वर्ष के हो जाएंगे। दलाई लामा भारत के हिमाचल प्रदेश में स्थित धर्मशाला के मैकलियोडगंज में रहते हैं।
दलाई लामा के निवास को त्सुगलाखांग भी कहा जाता है। तिब्बत में जन्में दलाई लामा को तिब्बत क्यों छोड़ना पड़ा और वह भारत कैसे पहुंचे? आइए जानते हैं
दलाई लामा तिब्बत के आध्यात्मिक नेता हैं। उनका जन्म 6 जुलाई 1935 में हुआ था। दलाई लामा का असली नाम तेनज़िन ग्यात्सो है और उन्हें 4 साल की उम्र में 14वें दलाई लामा के रूप में चुना गया था। बौद्ध धर्म को मानने वाले दलाई लामा को गुरु के रूप में मानते हैं।
जब 1950 में चीन ने तिब्बत पर हमला किया और 23 मई 1951 को चीन ने तिब्बत पर कब्जा कर लिया था। साल 1959 में तिब्बत में चीन के खिलाफ आंदोलन हुआ था। इस आंदोलन को चीन ने क्रूरता से खत्म कर दिया जिसमें हजारों तिब्बतियों की मौत हुई।
चीन की सेना ने ल्हासा पर कब्जा कर लिया था जहां दलाई लामा का महल था। ऐसा लग रहा था कि चीन उन्हें गिरफ्तार कर सकता है। जिसके बाद 17 मार्च 1959 को दलाई लामा ने तिब्बत छोड़ दिया।
17 मार्च 1959 को दलाई लामा भेष बदल कर अपनी मां, छोटे भाई, बहन, सहायकों और रक्षकों के साथ अपना महल छोड़ तिब्बत की राजधानी ल्हासा से भारत की ओर रवाना हो गए थे। दलाई लामा 13 दिन की यात्रा के बाद 31 मार्च को भारत पहुंचे। उन्होंने भारत पहुंचने के लिए खेनज़ीमन रास्ता का इस्तेमाल किया था।
भारत आने के लिए दलाई लामा ने हिमालय और ब्रह्मपुत्र नदी को पार किया था, वो लोग अरुणाचल प्रदेश के तवांग में रुके थे और दलाई लामा को सुरक्षित लाने की जिम्मेदारी असम राइफल्स को दी गई थी।
भारत सरकार ने 3 अप्रैल 1959 को दलाई लामा को भारत में शरण दे दी। आज भी हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में तिब्बत से आए हुए हजारों लोग रहते हैं।