4 February 2026
जनरेशन Z ,1997 से 2012 के बीच इन 15 सालों में पैदा हुए बच्चों को कहा जाता है। साल 2025 तक यह जनरेशन दुनिया की करीब 30% वर्कफोर्स बन चुकी है।
Gen-Z को डिजिटल नेटिव भी कहा जाता है, क्योंकि इनके लिए इंटरनेट, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया हमेशा से ही जिंदगी का हिस्सा रहे हैं। यही वजह है कि टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल इनके लिए आसान है।
ऑनलाइन शॉपिंग से लेकर वर्क फ्रॉम होम तक, Gen-Z डिजिटल दुनिया में पूरी तरह फिट बैठती है। अपनी अलग सोच व आदतों से सोसाईटी और इकॉनमी दोनों पर असर डाल रही है।
Gen-Z बहुत ही स्मार्ट तरीके से सोचते हैं। यही वजह है कि ये अपनी फ्यूचर की प्लानिंग बहुत पहले से ही शुरू कर देते हैं। इसके अलावा, अपनी कमाई बढ़ाने और फाइनेंशियल स्टेबिलिटी पाने के लिए Gen-Z साइड हसल भी करते हैं।
Gen-Z डेस्कटॉप के जगह मोबाइल पर ही ज्यादा काम करते हैं। 81% लोग सोशल मीडिया पर ही प्रोडक्ट खोजते हैं और 85% नए प्रोडक्ट्स के बारे में इन्हीं प्लेटफॉर्म से पता लगाते हैं। इनकी ये आदतें उनके खरीदारी के तरीकों को भी बदल रही हैं।
रिसर्च में पता चला है Gen Z पहली ऐसी जेनरेशन है, जिसका IQ स्कोर अपनी पुरानी जेनरेशन से कम है। एक्सपर्ट्स की माने तो Gen Z वाले लोग डिजिटल चीजों का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं और उनका एजुकेशन सिस्टम भी बदल गया है। इसकी वजह से उनका IQ कम हो सकता है।
Gen Z की ताकत अलग-अलग क्षेत्रों में है। Gen Z टेक्नोलॉजी, डिजिटल स्किल्स, क्रिएटिविटी, मल्टी-टास्किंग और सोशल अवेयरनेस में काफी आगे है। वे नई चीजें तेजी से सीखते हैं, बदलावों के साथ खुद को ढाल लेते हैं और ग्लोबल मुद्दों पर ज्यादा जागरूक हैं।