मध्य प्रदेश के देवास शहर में एक ऐसी जगह है जो श्रद्धा और आस्था का बड़ा केंद्र बनी हुई है। यह है देवास टेकरी, जहां मां चामुंडा और मां तुलजा भवानी (बड़ी माता) का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। यह मंदिर 300 फीट ऊंची शंखाकार पहाड़ी पर बसा है। लोग इसे माता टेकरी या देवास माता टेकरी के नाम से जानते हैं। मंदिर 1000 साल से ज्यादा पुराना माना जाता है। यहां माता की प्रतिमा गुफा में चट्टान पर खुदी हुई है। नवरात्रि में यहां लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। यह जगह सिर्फ मंदिर नहीं बल्कि शक्ति और भक्ति का दिव्य धाम है।

 

यहां की हरियाली, ऊंचाई और सुंदर नजारे मन को शांति देते हैं। देवास शहर का नाम भी इसी टेकरी से जुड़ा है। कहा जाता है कि देवास मतलब देवी का वास स्थान। समय के साथ यह नाम देवास हो गया। यह मंदिर रक्तपीठ के रूप में जाना जाता है क्योंकि मान्यता है कि यहां माता सती का रक्त गिरा था। अन्य शक्तिपीठों में माता के अंग गिरे थे लेकिन यहां रक्त गिरने से मां चामुंडा प्रकट हुईं। इसलिए इसे रक्तपीठ कहते हैं।

 

टेकरी का इतिहास और महत्व

 

टेकरी का इतिहास बहुत पुराना है। यह समुद्र तल से लगभग 300 फीट ऊंची है। पहाड़ी शंख जैसी आकृति की है। यहां दो मुख्य मंदिर हैं। एक मां चामुंडा का जो छोटी माता कहलाती हैं और दूसरा मां तुलजा भवानी का जो बड़ी माता हैं। दोनों बहनों के रूप में मानी जाती हैं। लोक मान्यता है कि यहां माता सती का रक्त गिरा था। इससे दो देवियां प्रकट हुईं। चामुंडा छोटी बहन और तुलजा भवानी बड़ी बहन हैं। देवास रियासत की कुलदेवी तुलजा भवानी हैं।

 

माराठी राजपरिवार ने यहां मंदिर स्थापित किया था। मंदिर में माता की प्रतिमा गुफा में चट्टान पर उत्कीर्ण है। यह प्राचीन है और जागृत मानी जाती है। कई साधकों ने यहां तपस्या की। राजा भर्तहरि, गुरु गोरखनाथ और योगेंद्र शीलनाथ जैसे महापुरुषों ने यहां घोर तप किया। कहा जाता है कि संत विचारनाथ ने यहां दोनों देवियों को बुलाकर एक राक्षस का नाश करवाया था। इस वजह से मंदिर में दोनों देवियां साथ विराजमान हैं। यहां नौ माताओं की उत्पत्ति हुई मानी जाती है। जैसे पार्वती, विजयासन, कालिका, अष्टभुजा, अन्नपूर्णा, खो-खो माता आदि। मंदिर परिसर में बजरंग बली, भेरू, गणेश और अन्य देवताओं के छोटे मंदिर भी हैं। पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा है।

 

मंदिर की संरचना और दर्शन कैसे करें?

 

टेकरी पर चढ़ने के लिए सीढ़ियां हैं। लगभग 300 फीट ऊंचाई चढ़नी पड़ती है। लेकिन अब रोपवे की सुविधा भी है। नवरात्रि में रोपवे सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक चलता है। इससे बुजुर्ग और बच्चे आसानी से ऊपर पहुंच जाते हैं। पहाड़ी पर पहुंचकर पहले बड़ी माता तुलजा भवानी के दर्शन होते हैं। फिर छोटी माता चामुंडा के। मंदिर गुफा जैसा है। चट्टान पर खुदी प्रतिमा बहुत सुंदर है। भक्त यहां फूल, चढ़ावा और नारियल चढ़ाते हैं। भोग में 5 पान के बीड़े का विशेष महत्व है।

 

मंदिर में भजन-कीर्तन चलते रहते हैं। नवरात्रि में पूरा परिसर रोशनी से जगमगाता है। फूलों से सजावट होती है। दर्शन के लिए सुबह जल्दी पहुंचना बेहतर है। भीड़ ज्यादा होती है लेकिन व्यवस्था अच्छी रहती है। प्रशासन सुरक्षा और सफाई का पूरा ध्यान रखता है। नवरात्रि में 9 दिन में 20 लाख से ज्यादा श्रद्धालु आते हैं। दूर-दूर से पैदल चलकर लोग आते हैं। कुछ लोग सिर मुंडवाकर या लोटा चढ़ाकर मनौती मांगते हैं। माता यहां सच्ची मनोकामना पूरी करती हैं। लोग सौभाग्य, आरोग्य, सुख, यश और जय की कामना करते हैं।

 

नवरात्रि में विशेष उत्सव और भीड़

 

नवरात्रि टेकरी का सबसे बड़ा उत्सव है। चैत्र और शारदीय दोनों नवरात्रि में यहां मेला लगता है। लाखों भक्त उमड़ते हैं। नौ दिनों तक माता का जागरण रहता है। गरबा, भजन और आरती होती है। मंदिर परिसर में दुकानें लगती हैं। प्रसाद, फूल और पूजा सामग्री मिलती है। नवरात्रि में माता का स्वरूप तीन बार बदलता है मानी जाती है। लोककथा में इसका रहस्य जुड़ा है। पहले दिन माता बालिका रूप में, फिर युवा और फिर वृद्ध रूप में दिखती हैं। भक्त इसे चमत्कार मानते हैं।

 

नवरात्रि के बाद दानपेटियां खोली जाती हैं। इसमें लाखों रुपये, सोना-चांदी और विदेशी मुद्रा मिलती है। इससे मंदिर की व्यवस्था चलती है। देवास शहर में नवरात्रि का अलग ही रंग होता है। लोग माता के दर्शन के बाद शहर में घूमते हैं। टेकरी के नजारे बहुत खूबसूरत हैं। हरी-भरी पहाड़ियां और शहर का नजारा नीचे से दिखता है। शाम को सूर्यास्त का दृश्य मन मोह लेता है।

 

क्यों आएं यहां और क्या सावधानियां रखें?


देवास टेकरी सिर्फ धार्मिक जगह नहीं बल्कि पर्यटन स्थल भी है। यहां आकर शांति और नई ऊर्जा मिलती है। इंदौर, उज्जैन और भोपाल से आसानी से पहुंचा जा सकता है। देवास रेल और सड़क से जुड़ा है। मंदिर परिसर में पानी और शौचालय की सुविधा है। नवरात्रि में भीड़ ज्यादा होती है इसलिए सुबह जल्दी जाएं। आरामदायक कपड़े और जूते पहनें। पानी साथ रखें। बुजुर्गों और बच्चों का विशेष ध्यान रखें। रोपवे से जाना आसान है। यहां आकर माता से मनोकामना मांगें। सच्ची श्रद्धा से दर्शन करें।

 

माता की कृपा से जीवन में सुख-शांति मिलती है। देवास टेकरी मध्य प्रदेश की आध्यात्मिक धरोहर है। यहां की यात्रा जीवन भर याद रहती है। अगर आप कभी देवास आएं तो जरूर टेकरी जाएं। मां चामुंडा और तुलजा भवानी के चरणों में झुकें और आशीर्वाद लें।